गरीबी एक व्यथा ???????? -Poem
हर दर्द को खुद पीना है, गरीबों का जीना भी क्या जीना है।। दूर होने लगते अपने ही क़रीबी, जब भी जिंदगी में आती गरीबी ।। गरीबों की हँसी उड़ायी जाती है, एक रोटी देकर दस तस्वीर खिंचवाई जाती है।। परिस्थिति है गरीब की, विचार नहीं ग़रीब जरूर है मगर लाचार नहीं।। अमीर महलों में रहता है, गरीब सड़क किनारे सोता है। गरीब मजबूर होता है मगर कमजोर नहीं।। खुदा खुद बिक जाता हैं बाजार में ताकि गरीबों के बच्चे भी खाना खा सके त्योहार में।। गरीब मजदूर शहर में ऊंची इमारतें बनाता हैं, शाम को थक कर टूटी झोपड़ी में सो जाता हैं।। फेंक रहा अमीर खाना क्योंकि आज रोटी थोड़ी सूखी हैं, उसे क्या पता गरीब की बेटी कब से भूखी हैं।।। गरीबी के चंगुल से खुद को छुड़ाना होगा, पकड़कर शिक्षा का हाथ गरीबों को आगे बढाना होगा।। एडवोकेट डाँ प्रिया शर्मा







