उठो(Inspirational) - Poem by Nikita Jaiswal - Spenowr
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Nikita Jaiswal

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उठो

होगा ऐसा वक्त भी कभी , बिखरा हुआ लगेगा सभी, टूटते हुए दिखेंगे सपने कभी, छूटते हुए दिखेंगे अपने कभी, होगी वो तुम्हारी परीक्षा की घड़ी, लगेगी तुम्हें हर विपत्ति से बड़ी, पर एक बात न भूलना तुम, कभी भी ना रुकना तुम, गिरने का डर लगेगा तुम्हें, पर गिरने न देगा ईश्वर तुम्हें, थामा है जिसने आजतक तुम्हें, सम्भालेगा आगे भी तुम्हें, बस चलते ही जाना तुम, विपत्ति में नहीं घबराना तुम… निकिता????
By: ©Nikita Jaiswal
www.spenowr.com
उठो -Poem

होगा ऐसा वक्त भी कभी , बिखरा हुआ लगेगा सभी, टूटते हुए दिखेंगे सपने कभी, छूटते हुए दिखेंगे अपने कभी, होगी वो तुम्हारी परीक्षा की घड़ी, लगेगी तुम्हें हर विपत्ति से बड़ी, पर एक बात न भूलना तुम, कभी भी ना रुकना तुम, गिरने का डर लगेगा तुम्हें, पर गिरने न देगा ईश्वर तुम्हें, थामा है जिसने आजतक तुम्हें, सम्भालेगा आगे भी तुम्हें, बस चलते ही जाना तुम, विपत्ति में नहीं घबराना तुम… निकिता????



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